Sunday, 16 August 2026

मेरा सलाम

 


तेल का ज्यादा दाम चुकाए जो

दाल-भात सब महंगी खाए जो

मेरा सलाम!

 

मध्यम वर्ग के बचत खातों को

निम्न वर्ग के लथपथ हाथों को

मेरा सलाम!

 

तिरंगे के तीनों जगमग रंग को

भारत भूभाग के हर अंग को

मेरा सलाम!

Friday, 14 August 2026

देर हो जाती है

 



 

जाओ-जाओ सुनकर भी छोड़ जाने में

आओ-आओ सुनकर भी आ जाने में

देर हो जाती है

 

नीयत जो है आपकी, उसे बदलने में

नीति आखिर क्या होगी, यह बताने में

देर हो जाती है

 

सड़कों पर आ चुकी भीड़ को भगाने में

सदन में हो रहे शोर को शांत कराने में

देर हो जाती है

 

सियासत के शफे को शफ्फाक रखने में

सड़क से सदन तक को शांत करने में

देर हो जाती है

 

भारी पड़ जाती है देरी, सुबह जागने में

भारी हो चुकी जो शाम, हल्का बनाने में

देर हो जाती है

Saturday, 1 August 2026

बेटी पूछती है



 

गुड़िया क्यों न खेले गुड्डों का सारा खेल, बेटी पूछती है

हरदम क्यों नाप-जोख, क्यों हमारा मेल, बेटी पूछती है

 

मैंने भी ढोए उतने ही बस्ते भारी-भरकम हरदम-हर दिन

हर इम्तिहान में पास, हुई कभी क्या फेल, बेटी पूछती है

 

मांगी मैंने तो दे दी साइकल, जाना पर बबुआ के पीछे

देकर यह नसीहत क्यों डर में रहे धकेल, बेटी पूछती है

 

उछलकूद घर में तो अच्छा, बाहर की दौड़ में दुश्वारी

क्यों नहीं में उस टीम में जो खेलती खेल, बेटी पूछती है

 

पढ़ाई-लिखाई, स्कूल-कॉलेज, हर इम्तिहान से गुजरूंगी

सर्विस में जाऊं मैं तो क्या हो जाएगी जेल, बेटी पूछती है

 

गुड़िया क्यों न खेले गुड्डों का सारा खेल, बेटी पूछती है

हरदम क्यों नाप-जोख, क्यों हमारा मेल, बेटी पूछती है


Monday, 27 July 2026

मूर्खता का सिलेबस

 


जरा सा बेईमान हो लेता तो यूं बेबस नहीं होता

टुकड़ों में बेच ईमान लेता तो यूं बेबस नहीं होता

 

हमारी सारी होशियारी होती रही नीलाम सरेबाजार

सच कहते हैं, मूर्खता का कोई सिलेबस नहीं होता

Tuesday, 21 July 2026

बेटा पूछता है


 

कमाई उम्रभर की कहां रखी, बेटा पूछता है

बनाई जो मिल्कियत गई कहां, बेटा पूछता है

 

ढली उमरिया आपकी, चढ़ी मेरी जवानी है

लिखा क्या अपनी वसीयत में, बेटा पूछता है

 

मेरे सपनों का सारा दारोमदार टिका आप पर

पूरे आपकी सोहबत में होंगे ना, बेटा पूछता है

 

बिताई आपने भी होगी जवानी अपनी मर्जी से

मुझे टोकने की क्यों है जरूरत, बेटा पूछता है

 

सोचता हूं मैं किससे पूछूं किसकी मर्जी रही

नहीं मुझमें जरा भी हिम्मत मगर, बेटा पूछता है

Thursday, 9 July 2026

चार-चार लाइनें

 




तुम दुबली रही, मेरा मोटापा आ गया

उम्र पर दोनों की बढ़ी,

आंखों के दरमियां ये चश्मा आ गया

 

तुम शांत थी, अब गुस्सैल हो चली

लाजिमी था यह होना,

दवा भी होमियो से एलोपैथ हो चली

 

 

 

इश्क करूंगा जीभर कर देख लेना, देख लेना

फेरे भी लूंगा पूरे सात, गिन लेना तुम गिन लेना

एक निवेदन तुमसे है प्रिये, फेरे से पहले तुम-

लोहागढ़ किले से न धकेल देना न धकेल देना

 

 

लहरें आती ही हैं साहिल को समा लेने की खातिर

समंदर, तुम तो हमेशा से साम्राज्यवादी रहे हो

अपने पाट को और चौड़ा करने की जुगत रहती है

पश्चिम ही नहीं पूरब में भी विस्तारवादी रहे हो



जगह एक है और जिला यह महापुरुषों का धाम

इनकी प्रतिमा, उनकी मूर्ति से बिगड़ेंगे सारे काम

फेंको सारी पर्ची, जिसमें लिखे नाम और उपनाम

बनवा दो पुष्ट वाटिका फिर गूंथो माला सबके नाम



Sunday, 21 June 2026

पहले रोटी खाने दो

 


प्यार-मोहब्बत और इश्क-विश्क, जाने दो

भूख लगी है हमको, पहले रोटी खाने दो

 

दल-बदल और टूट-फूट की बातें हैं सियासी

छोड़ो इन बातों को, धंधे पर ध्यान लगाने दो

 

बादल गरजे, पर बरसे नहीं, सूखे हैं खेत

धीरज धरो कुछ दिन, सावन को आने दो

 

कसमें-वादे मैं करता नहीं अब भूले से

चौखट पर अंधियारा है, इसको छंट जाने दो

 

छूटे हैं जितने काम मेरे, सब करेंगे बाद में

भूख लगी है हमको, पहले रोटी खाने दो

Saturday, 6 June 2026

प्रधान की परीक्षा


 


परीक्षा के लिए परीक्षा ले रहे दिल्ली के प्रधान

 दिल्ली के प्रधान कहते हैं, दें फिर से इम्तिहान

 दें फिर से इम्तिहान हमारे बच्चे, कैसा विधान

 कैसा यह विधान प्रधान, बच्चे की ले लोगे जान

 

 नीट दिया, अब कहते हैं री-नीट लेगी सरकार

 कॉपी नहीं बदलेगी फिर से, लोगे गारंटी सरकार

 दसवीं वाले तड़प रहे, 12वीं वाले बेदम सरकार

 माफी दो बच्चों को, गर्मी में मत झुलसाओ सरकार

 

कहते हैं कि इस मसले पर नजर गड़ाए हुए हैं साहब

 नजर गड़ाकर दो हाकिम को बदल चुके हैं साहब

 निपटाए छोटी मछली, बड़ी क्या कर रहे हैं साहब

 करिए रहम अपने ही बच्चे हैं, क्या कहते हैं साहब


Sunday, 31 May 2026

सत्ता के खेल निराले


गए रमैया सिद्धी पाने, शिव को आखिर मिल गई सत्ता

शिव को सत्ता क्योंकि ले बैठे थे हेमंता की भांति कत्ता

देख लिया गुवाहाटी, बेंगलुरू और देखा है कलकत्ता

राजस्थान के परेशान पायलट का पर खुल न पाया पत्ता

 

 

 

बशीर बद्र की याद में-

अगर तलाश करूं तो कोई मिल ही जाएगा

मगर तुम्हारी तरह हमें गजलें कौन सुनाएगा


Monday, 25 May 2026

महंगाई डायन




बढ़े तेल के दाम, फिर छाने लगी महंगाई

छाने लगी महंगाई, छूटेगी सबकी रुलाई

डायन ने फिर दी है दस्तक, जाएगी खाय

जाएगी खाय, हाय फिर छाने लगी महंगाई


जंग छिड़ी उनके घर, पर जेब जली हमारी

जेब जली ऐसी कि लुट जाएगी बचत सारी

कंटनी-छंटनी का दौर आएगा, क्या करेंगे?

क्या करेंगे, यह महंगाई भी अब पड़ेगी भारी


कॉकरोच सब जमा हुए, पर क्या कर लेंगे

क्या कर लेंगे, ये बेरोजगार क्या हमको देंगे

हमको देंगे क्या जो सोशल मीडिया पर आए

सोशल मीडिया से क्या कीमत में राहत देंगे

Wednesday, 20 May 2026

पुल




बहुत छोटे से वक्त में आधारहीन हो गए हो

पुल, तुम क्यों इतने अनुशासनहीन हो गए हो

वहां बनने से पहले लुढ़के, यहां बनने के बाद

रहगुजर की तरह तुम भी साधनहीन हो गए हो

 

पुल, तुम क्यों इतने अनुशासनहीन हो गए हो

रहगुजर की तरह तुम भी साधनहीन हो गए हो

Wednesday, 13 May 2026

सब गिर रहा


 



सोना-चांदी का ताव, रुपए का भाव, सब गिर रहा है

इजराइली दाव, अमेरिका का प्रभाव, सब गिर रहा है

 

आगाज जंग का जिसने भी किया, अंजाम पा न रहा

रूसी प्रभाव, अमेरिका का प्रस्ताव, सब गिर रहा है

 

ऑपरेशन सिंदूर के बरस पूरे कर गया अपना भारत

पाकिस्तान पर दबाव, उसका बर्ताव, सब गिर रहा है

 

चुनावों के बाद बदले रहे सरकारों के सरदार, मगर-

वोटरों का जुड़ाव, लोगों का चाव, सब गिर रहा है

 

बातें दुनिया की करो या किस्सा देश का सुना आओ

राजनीतिक दबाव, रणनीतिक फैलाव, सब गिर रहा है

 

इजराइली दाव, अमेरिका का प्रभाव, सब गिर रहा है

सोना-चांदी का ताव, रुपए का भाव, सब गिर रहा है

Saturday, 2 May 2026

दीदी का बंगाल

 


देश के दादा चाह रहे छीनें दीदी का बंगाल

छीनें दीदी का बंगाल, करें उनको कंगाल

करें उनको कंगाल, कमल हो मालामाल

फिर कहेंगे दादा, मेरा हुआ दीदी का बंगाल

Tuesday, 28 April 2026

गोली चल रही है

 


दुनिया के दादा बचके, गोली चल रही है

टेबल के नीचे जा घुसिए, गोली चल रही है

दुनियाभर में भले आपकी बोली चल रही है

घर में ही आपके, मगर गोली चल रही है

 

तलवे चाट रहा अपना छुटकुन पाकिस्तान

उसको तो पैसे से मतलब बेच रहा है ईमान

बम फोड़ रहे आप मर रहे नाहक ही इंसान

बचा कौन है, ना ईरान, ना अफगानिस्तान

 

पश्चिम के गोले से आई है पूरब में आफत

पूरब में आई आफत तो कैसे आप अनाहत

बड़े जंगजू आप, चाहत में है तेल की राहत

दादा कैसे बने रहोगे जब पूरी दुनिया आहत

 

दुनिया के दादा बचके, गोली चल रही है

टेबल के नीचे जा घुसिए, गोली चल रही है

Thursday, 16 April 2026

छुटकुन

 


बना चौधरी छुटकुन अपना टेबल दिया सजाय

टेबल दिया सजाय, बैठा पलक पांवड़े बिछाय

शांति खोजने पूरब आया, ताल ठोकने पश्चिम

बना चौधरी छुटकुन अपना टेबल दिया सजाय

 

किस मुल्क से लकड़ी आई और कहां से इशारा

मेजपोश किसने दी, छुटकुन ने कैसे खूंटा गाड़ा

बंद कमरे में एक-दूजे के सम्मुख दिया बिठाय

बना चौधरी छुटकुन अपना टेबल दिया सजाय

 

छुटकुन दोनों को साध रहा, उड़कर आए बेचारे

एक, आंख में आंसू लेकर, दूजा ले आया अंगारे

दोनों अपने-अपने घर लौटे सबको ठेंगा दिखाय

बना चौधरी छुटकुन अपना टेबल दिया सजाय

Wednesday, 15 April 2026

बिहार की राजनीति


 




पहली बार गेरूआ सरदार देखेगी पुरानी सरकार

सूबे की सत्ता में लिखेगी अब नई कहानी सरकार

पाटलिपुत्र की गद्दी पर आये हैं अब सम्राट नये

सुशासन की अब नई-नई छोड़िए निशानी सरकार

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सुशासन के नये खेवैया, सम्राट रहेंगे पटना में

तीर गिरा दिल्ली जाकर, खिला कमल पटना में

खिला कमल पटना में, डबल इंजन की सरकार

बदलेगा गणित सियासत का नये सिरे से पटना में

Monday, 9 March 2026

सत्तांतरण

 

समाजवाद की अर्थी पर वंशवाद के पुष्प चढ़ाएं

आओ राजपुत्र, तुम्हें साम्राज्यवाद का तिलक लगाएं

 

तुम तेजस्वी हो, तुम प्रदीप्त चिराग

रामनाथ, तुझमें अखिलेश का राग

नतमस्तक हैं दरबारी सब, मिलकर चारण गाएं

आओ राजपुत्र, तुम्हें साम्राज्यवाद का तिलक लगाएं

 

लोकतंत्र पर क्यों करनी बात

समाजवाद अब कल की बात

उत्तराधिकार तुम्हें अर्पित, आ जाओ सम्राट बनाएं

आओ राजपुत्र, तुम्हें साम्राज्यवाद का तिलक लगाएं

 

तख्त संभालो, ताज संभालो

खानदान की तुम लाज संभालो

जातिवाद का गणित सिखा, तुमको राजनीतिज्ञ बनाएं

आओ राजपुत्र, तुम्हें साम्राज्यवाद का तिलक लगाएं

मेरा सलाम

  तेल का ज्यादा दाम चुकाए जो दाल-भात सब महंगी खाए जो मेरा सलाम!   मध्यम वर्ग के बचत खातों को निम्न वर्ग के लथपथ हाथों को मेरा सल...