परीक्षा के लिए परीक्षा
ले रहे दिल्ली के प्रधान
कहते हैं कि इस मसले
पर नजर गड़ाए हुए हैं साहब
मुझे अच्छी लगती है... शब्दों की दुनिया
परीक्षा के लिए परीक्षा
ले रहे दिल्ली के प्रधान
कहते हैं कि इस मसले
पर नजर गड़ाए हुए हैं साहब
शिव को सत्ता क्योंकि
ले बैठे थे हेमंता की भांति कत्ता
देख लिया गुवाहाटी,
बेंगलुरू और देखा है कलकत्ता
राजस्थान के परेशान
पायलट का पर खुल न पाया पत्ता
बशीर बद्र की याद
में-
अगर तलाश करूं तो
कोई मिल ही जाएगा
मगर तुम्हारी तरह
हमें गजलें कौन सुनाएगा
बढ़े तेल के दाम, फिर छाने लगी महंगाई
छाने लगी महंगाई, छूटेगी सबकी रुलाई
डायन ने फिर दी है दस्तक, जाएगी खाय
जाएगी खाय, हाय फिर छाने लगी महंगाई
जंग छिड़ी उनके घर, पर जेब जली हमारी
जेब जली ऐसी कि लुट जाएगी बचत सारी
कंटनी-छंटनी का दौर आएगा, क्या करेंगे?
क्या करेंगे, यह महंगाई भी अब पड़ेगी भारी
कॉकरोच सब जमा हुए, पर क्या कर लेंगे
क्या कर लेंगे, ये बेरोजगार क्या हमको देंगे
हमको देंगे क्या जो सोशल मीडिया पर आए
सोशल मीडिया से क्या कीमत में राहत देंगे
बहुत छोटे से वक्त में आधारहीन हो गए हो
पुल, तुम क्यों इतने अनुशासनहीन हो गए हो
वहां बनने से पहले
लुढ़के, यहां बनने के बाद
रहगुजर की तरह तुम
भी साधनहीन हो गए हो
पुल, तुम क्यों इतने
अनुशासनहीन हो गए हो
सोना-चांदी का ताव,
रुपए का भाव, सब गिर रहा है
इजराइली दाव, अमेरिका
का प्रभाव, सब गिर रहा है
आगाज जंग का जिसने
भी किया, अंजाम पा न रहा
रूसी प्रभाव, अमेरिका
का प्रस्ताव, सब गिर रहा है
ऑपरेशन सिंदूर के
बरस पूरे कर गया अपना भारत
पाकिस्तान पर दबाव,
उसका बर्ताव, सब गिर रहा है
चुनावों के बाद बदले
रहे सरकारों के सरदार, मगर-
वोटरों का जुड़ाव,
लोगों का चाव, सब गिर रहा है
बातें दुनिया की करो
या किस्सा देश का सुना आओ
राजनीतिक दबाव, रणनीतिक
फैलाव, सब गिर रहा है
इजराइली दाव, अमेरिका
का प्रभाव, सब गिर रहा है
सोना-चांदी का ताव,
रुपए का भाव, सब गिर रहा है
देश के दादा चाह रहे
छीनें दीदी का बंगाल
छीनें दीदी का बंगाल,
करें उनको कंगाल
करें उनको कंगाल,
कमल हो मालामाल
फिर कहेंगे दादा, मेरा हुआ दीदी का बंगाल
दुनिया के दादा बचके,
गोली चल रही है
टेबल के नीचे जा घुसिए,
गोली चल रही है
दुनियाभर में भले
आपकी बोली चल रही है
घर में ही आपके, मगर
गोली चल रही है
तलवे चाट रहा अपना
छुटकुन पाकिस्तान
उसको तो पैसे से मतलब
बेच रहा है ईमान
बम फोड़ रहे आप मर
रहे नाहक ही इंसान
बचा कौन है, ना ईरान,
ना अफगानिस्तान
पश्चिम के गोले से
आई है पूरब में आफत
पूरब में आई आफत तो
कैसे आप अनाहत
बड़े जंगजू आप, चाहत
में है तेल की राहत
दादा कैसे बने रहोगे
जब पूरी दुनिया आहत
दुनिया के दादा बचके,
गोली चल रही है
टेबल के नीचे जा घुसिए,
गोली चल रही है
परीक्षा के लिए परीक्षा ले रहे दिल्ली के प्रधान दिल्ली के प्रधान कहते हैं, दें फिर से इम्तिहान दें फिर से इम्तिहान हमारे बच्चे,...