Monday, 27 July 2026

मूर्खता का सिलेबस

 


जरा सा बेईमान हो लेता तो यूं बेबस नहीं होता

टुकड़ों में बेच ईमान लेता तो यूं बेबस नहीं होता

 

हमारी सारी होशियारी होती रही नीलाम सरेबाजार

सच कहते हैं, मूर्खता का कोई सिलेबस नहीं होता

Tuesday, 21 July 2026

बेटा पूछता है


 

कमाई उम्रभर की कहां रखी, बेटा पूछता है

बनाई जो मिल्कियत गई कहां, बेटा पूछता है

 

ढली उमरिया आपकी, चढ़ी मेरी जवानी है

लिखा क्या अपनी वसीयत में, बेटा पूछता है

 

मेरे सपनों का सारा दारोमदार टिका आप पर

पूरे आपकी सोहबत में होंगे ना, बेटा पूछता है

 

बिताई आपने भी होगी जवानी अपनी मर्जी से

मुझे टोकने की क्यों है जरूरत, बेटा पूछता है

 

सोचता हूं मैं किससे पूछूं किसकी मर्जी रही

नहीं मुझमें जरा भी हिम्मत मगर, बेटा पूछता है

Thursday, 9 July 2026

चार-चार लाइनें

 




तुम दुबली रही, मेरा मोटापा आ गया

उम्र पर दोनों की बढ़ी,

आंखों के दरमियां ये चश्मा आ गया

 

तुम शांत थी, अब गुस्सैल हो चली

लाजिमी था यह होना,

दवा भी होमियो से एलोपैथ हो चली

 

 

 

इश्क करूंगा जीभर कर देख लेना, देख लेना

फेरे भी लूंगा पूरे सात, गिन लेना तुम गिन लेना

एक निवेदन तुमसे है प्रिये, फेरे से पहले तुम-

लोहागढ़ किले से न धकेल देना न धकेल देना

 

 

लहरें आती ही हैं साहिल को समा लेने की खातिर

समंदर, तुम तो हमेशा से साम्राज्यवादी रहे हो

अपने पाट को और चौड़ा करने की जुगत रहती है

पश्चिम ही नहीं पूरब में भी विस्तारवादी रहे हो



जगह एक है और जिला यह महापुरुषों का धाम

इनकी प्रतिमा, उनकी मूर्ति से बिगड़ेंगे सारे काम

फेंको सारी पर्ची, जिसमें लिखे नाम और उपनाम

बनवा दो पुष्ट वाटिका फिर गूंथो माला सबके नाम



मेरा सलाम

  तेल का ज्यादा दाम चुकाए जो दाल-भात सब महंगी खाए जो मेरा सलाम!   मध्यम वर्ग के बचत खातों को निम्न वर्ग के लथपथ हाथों को मेरा सल...