बढ़े तेल के दाम, फिर छाने लगी महंगाई
छाने लगी महंगाई, छूटेगी सबकी रुलाई
डायन ने फिर दी है दस्तक, जाएगी खाय
जाएगी खाय, हाय फिर छाने लगी महंगाई
जंग छिड़ी उनके घर, पर जेब जली हमारी
जेब जली ऐसी कि लुट जाएगी बचत सारी
कंटनी-छंटनी का दौर आएगा, क्या करेंगे?
क्या करेंगे, यह महंगाई भी अब पड़ेगी भारी
कॉकरोच सब जमा हुए, पर क्या कर लेंगे
क्या कर लेंगे, ये बेरोजगार क्या हमको देंगे
हमको देंगे क्या जो सोशल मीडिया पर आए
सोशल मीडिया से क्या कीमत में राहत देंगे
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