Sunday, 21 June 2026

पहले रोटी खाने दो

 


प्यार-मोहब्बत और इश्क-विश्क, जाने दो

भूख लगी है हमको, पहले रोटी खाने दो

 

दल-बदल और टूट-फूट की बातें हैं सियासी

छोड़ो इन बातों को, धंधे पर ध्यान लगाने दो

 

बादल गरजे, पर बरसे नहीं, सूखे हैं खेत

धीरज धरो कुछ दिन, सावन को आने दो

 

कसमें-वादे मैं करता नहीं अब भूले से

चौखट पर अंधियारा है, इसको छंट जाने दो

 

छूटे हैं जितने काम मेरे, सब करेंगे बाद में

भूख लगी है हमको, पहले रोटी खाने दो

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