जरा सा बेईमान
हो लेता तो यूं बेबस नहीं होता
टुकड़ों में बेच
ईमान लेता तो यूं बेबस नहीं होता
हमारी सारी होशियारी
होती रही नीलाम सरेबाजार
सच कहते हैं, मूर्खता
का कोई सिलेबस नहीं होता
तेल का ज्यादा दाम चुकाए जो दाल-भात सब महंगी खाए जो मेरा सलाम! मध्यम वर्ग के बचत खातों को निम्न वर्ग के लथपथ हाथों को मेरा सल...
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