जरा सा बेईमान
हो लेता तो यूं बेबस नहीं होता
टुकड़ों में बेच
ईमान लेता तो यूं बेबस नहीं होता
हमारी सारी होशियारी
होती रही नीलाम सरेबाजार
सच कहते हैं, मूर्खता
का कोई सिलेबस नहीं होता
जरा सा बेईमान हो लेता तो यूं बेबस नहीं होता टुकड़ों में बेच ईमान लेता तो यूं बेबस नहीं होता हमारी सारी होशियारी होती रही नीलाम सरे...
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