देश के दादा चाह रहे
छीनें दीदी का बंगाल
छीनें दीदी का बंगाल,
करें उनको कंगाल
करें उनको कंगाल,
कमल हो मालामाल
फिर कहेंगे दादा, मेरा हुआ दीदी का बंगाल
जरा सा बेईमान हो लेता तो यूं बेबस नहीं होता टुकड़ों में बेच ईमान लेता तो यूं बेबस नहीं होता हमारी सारी होशियारी होती रही नीलाम सरे...
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