बहुत छोटे से वक्त में आधारहीन हो गए हो
पुल, तुम क्यों इतने अनुशासनहीन हो गए हो
वहां बनने से पहले
लुढ़के, यहां बनने के बाद
रहगुजर की तरह तुम
भी साधनहीन हो गए हो
पुल, तुम क्यों इतने
अनुशासनहीन हो गए हो
प्यार-मोहब्बत और इश्क-विश्क, जाने दो भूख लगी है हमको, पहले रोटी खाने दो दल-बदल और टूट-फूट की बातें हैं सियासी छोड़ो इन बातों को,...
No comments:
Post a Comment