Saturday, 1 August 2026

बेटी पूछती है



 

गुड़िया क्यों न खेले गुड्डों का सारा खेल, बेटी पूछती है

हरदम क्यों नाप-जोख, क्यों हमारा मेल, बेटी पूछती है

 

मैंने भी ढोए उतने ही बस्ते भारी-भरकम हरदम-हर दिन

हर इम्तिहान में पास, हुई कभी क्या फेल, बेटी पूछती है

 

मांगी मैंने तो दे दी साइकल, जाना पर बबुआ के पीछे

देकर यह नसीहत क्यों डर में रहे धकेल, बेटी पूछती है

 

उछलकूद घर में तो अच्छा, बाहर की दौड़ में दुश्वारी

क्यों नहीं में उस टीम में जो खेलती खेल, बेटी पूछती है

 

पढ़ाई-लिखाई, स्कूल-कॉलेज, हर इम्तिहान से गुजरूंगी

सर्विस में जाऊं मैं तो क्या हो जाएगी जेल, बेटी पूछती है

 

गुड़िया क्यों न खेले गुड्डों का सारा खेल, बेटी पूछती है

हरदम क्यों नाप-जोख, क्यों हमारा मेल, बेटी पूछती है


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