तुम दुबली रही, मेरा
मोटापा आ गया
उम्र पर दोनों की
बढ़ी,
आंखों के दरमियां
ये चश्मा आ गया
तुम शांत थी, अब गुस्सैल
हो चली
लाजिमी था यह होना,
दवा भी होमियो से
एलोपैथ हो चली
इश्क करूंगा जीभर
कर देख लेना, देख लेना
फेरे भी लूंगा पूरे
सात, गिन लेना तुम गिन लेना
एक निवेदन तुमसे है
प्रिये, फेरे से पहले तुम-
लोहागढ़ किले से न
धकेल देना न धकेल देना
लहरें आती ही हैं
साहिल को समा लेने की खातिर
समंदर, तुम तो हमेशा
से साम्राज्यवादी रहे हो
अपने पाट को और चौड़ा
करने की जुगत रहती है
पश्चिम ही नहीं पूरब
में भी विस्तारवादी रहे हो
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