तेल का ज्यादा दाम
चुकाए जो
दाल-भात सब महंगी
खाए जो
मेरा सलाम!
मध्यम वर्ग के बचत
खातों को
निम्न वर्ग के लथपथ
हाथों को
मेरा सलाम!
तिरंगे के तीनों जगमग
रंग को
भारत भूभाग के हर
अंग को
मेरा सलाम!
तेल का ज्यादा दाम
चुकाए जो
दाल-भात सब महंगी
खाए जो
मेरा सलाम!
मध्यम वर्ग के बचत
खातों को
निम्न वर्ग के लथपथ
हाथों को
मेरा सलाम!
तिरंगे के तीनों जगमग
रंग को
भारत भूभाग के हर
अंग को
मेरा सलाम!
जाओ-जाओ सुनकर भी
छोड़ जाने में
आओ-आओ सुनकर भी आ
जाने में
देर हो जाती है
नीयत जो है आपकी,
उसे बदलने में
नीति आखिर क्या होगी,
यह बताने में
देर हो जाती है
सड़कों पर आ चुकी
भीड़ को भगाने में
सदन में हो रहे शोर
को शांत कराने में
देर हो जाती है
सियासत के शफे को
शफ्फाक रखने में
सड़क से सदन तक को
शांत करने में
देर हो जाती है
भारी पड़ जाती है
देरी, सुबह जागने में
भारी हो चुकी जो शाम,
हल्का बनाने में
देर हो जाती है
गुड़िया क्यों न खेले
गुड्डों का सारा खेल, बेटी पूछती है
हरदम क्यों नाप-जोख,
क्यों हमारा मेल, बेटी पूछती है
मैंने भी ढोए उतने
ही बस्ते भारी-भरकम हरदम-हर दिन
हर इम्तिहान में पास,
हुई कभी क्या फेल, बेटी पूछती है
मांगी मैंने तो दे
दी साइकल, जाना पर बबुआ के पीछे
देकर यह नसीहत क्यों
डर में रहे धकेल, बेटी पूछती है
उछलकूद घर में तो
अच्छा, बाहर की दौड़ में दुश्वारी
क्यों नहीं में उस
टीम में जो खेलती खेल, बेटी पूछती है
पढ़ाई-लिखाई, स्कूल-कॉलेज,
हर इम्तिहान से गुजरूंगी
सर्विस में जाऊं मैं
तो क्या हो जाएगी जेल, बेटी पूछती है
गुड़िया क्यों न खेले
गुड्डों का सारा खेल, बेटी पूछती है
हरदम क्यों नाप-जोख,
क्यों हमारा मेल, बेटी पूछती है
तेल का ज्यादा दाम चुकाए जो दाल-भात सब महंगी खाए जो मेरा सलाम! मध्यम वर्ग के बचत खातों को निम्न वर्ग के लथपथ हाथों को मेरा सल...