Sunday, 7 March 2010

मेरी मां

मुझे खिलाने के बाद
चुपके से जाकर सो गयी
कटोरी भरकर दूध दी थी मुझे
बोली, मैं पी चुकी इसलिए कम रह गयी
वह बिस्तर पर खांस रही थी
मैं करवटें बदल रहा था.
मुझे मालूम है
मां आज फिर झूठ बोल गयी.

1 comment:

मेरा शहर said...

behad marmik panktiaan hain.jivan ka saara mool isi sabdo me nihit hai..dhanywad.

पुल

बहुत छोटे से वक्त में आधारहीन हो गए हो पुल, तुम क्यों इतने अनुशासनहीन हो गए हो वहां बनने से पहले लुढ़के, यहां बनने के बाद रहगुजर की तरह ...