बात-बात पर धमकी
और फटकार
सो-कोज के बाद
जारी तकरार
रोजनामचे में शामिल
उनका व्यवहार .
ये कैसे हो गया
वो कैसे हो गया
हमसे पूछ तो लेते
कह कर तो जाते
मुझे पसंद नहीं -
आगे से ऐसा नहीं चलेगा.
अपने को तो आदत है
ऐसे ही होता स्वागत है.
मेरी हाँ में हाँ मिलाना
तुमसे ही है ज़माना
बस यूं ही निहारता रहूँ
यूं डूबता रहूँ उतरता रहूँ
फिर मेरा कदम बढ़ाना
मेरी आदत है उकताना.
उसने भी है ठाना
पहले थोड़ा सकुचाना
फिर देह का चुराना
हंसी-ठट्ठे के बाद
एकाकार हो जाना
सारे रंजो गम भुलाकर
मुझको गले लगाकर
आँखें मूँद लेना
थोड़ी ही देर बाद
निंदिया के पास जाना
अपुन की ज़िंदगी है
ऐसे ही चलती है.
Saturday, 13 February 2010
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महंगाई डायन
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क्रांति क्रांति, तुम कैसी हो, क्या हैं तेरे हाल सुना, घर छोड़ गया जो बेटा था वाचाल तर्पण तुम्हारे विचारों का कर दिया अवशेष फल्गु क...
1 comment:
vakyi mai kavita aachi hai aur isaroon hi isaroon mai rajnataon aur badal rahe manav mulyon pr karara chot kiya hai aapne.
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