फिर वही समंदर
वही बड़ी मछली
और छोटी मछली
जारी है सिलसिला
खाने और निगलने का
ये और बात है
कि गोरे चले गए, पर
अगड़ा तो है पिछड़ो के लिए
उंच तो है नीच के लिए
मोटे हैं दुबले के लिए
समंदर की वही स्थिति है
बड़ी व्हेल का राज है
सब कुछ जानती है छोटी मछली
तड़प रही है, फंस रही है.
खाई-पचाई जा रही है.
Tuesday, 16 March 2010
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
मेरा सलाम
तेल का ज्यादा दाम चुकाए जो दाल-भात सब महंगी खाए जो मेरा सलाम! मध्यम वर्ग के बचत खातों को निम्न वर्ग के लथपथ हाथों को मेरा सल...
-
मानता हूँ कि सही आकर के लिए लोहे को खूब तपाया जाता है, फिर पीटा भी जाता है। छोटे-बड़े तरह-तरह के - हथोड़े का दर्द पिलाया जाता है। अच्छा होता...
-
पथ बदलते हैं हम और आप सभी घर बदलने के लिए घर सँवारने के लिए घर सजाने के लिए और अच्छे ठिकाने की चाहत में रास्ते आड़े हों रास्ते तिरछे ...
-
महाभारत फ़िर से दुहरा रहा है कौरव - पांडव में झमेला खड़ा है आधुनिक महाभारत काल - और अल्पसंख्यक पांडवों की जोर पकड़ती आरक्षण की मा...
No comments:
Post a Comment