Thursday, 4 March 2021

 

ओ कवि!

ओ कवि!

कुछ और रचो।

शब्द बहुत लिखे,

भाव भी उड़ेले।

 

देखो तो!

शब्द-भाव के हाल।

एक सहमा-सा,

दूजा बेजान-सा।

 

कविराज!

अर्थ पर आओ।

किसी को चुभे नहीं,

भवें कहीं तने नहीं।

 

नहीं मानोगे!

तो लिख डालो।

न डरे हैं, न डरेंगे

मेरे शब्द चुभेंगे।

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