सत्ता के नए ठांव
बिसरते गाँव
दहकता शहर
आतंक का कहर
बहुत गुल खिला गुजरे साल
सबको मुबारक नया साल।
पड़ोस क़ी आग
खूनी फाग
बिजनेस में बोर
रिश्ते का जोर
बहुत गुल खिला गुजरे साल
सबको मुबारक नया साल।
जानलेवा गर्मी
बाज़ार की नरमी
कानून से खिलवाड़
पैबंद लगी दीवार
बहुत गुल खिला गुजरे साल
सबको मुबारक नया साल।
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चार-चार लाइनें
तुम दुबली रही, मेरा मोटापा आ गया उम्र पर दोनों की बढ़ी, आंखों के दरमियां ये चश्मा आ गया तुम शांत थी, अब गुस्सैल हो चली लाजिमी ...
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पिता तलहटी में बचे तालाब के थोड़े से पानी भागती जिंदगी में बची थोड़ी सी जवानी दोनों को समेटकर सींचता हूं बड़े हो...
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मानता हूँ कि सही आकर के लिए लोहे को खूब तपाया जाता है, फिर पीटा भी जाता है। छोटे-बड़े तरह-तरह के - हथोड़े का दर्द पिलाया जाता है। अच्छा होता...
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चांद, तारे, फूल, शबनम ----------------- चांद, जिस पर मैं गया नहीं जिसे मैंने कभी छुआ नहीं उजले-काले रंगों वाला- जो दिन में कभी द...
1 comment:
Aaku Srivastava to me
i reciprocate the same
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